इस मामले में होलसेलर हिमांशु अग्रवाल को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार हिमांशु पहले भी नकली दवाओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक पुडुचेरी में भी नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़े मामले में उसका नाम सामने आया था।
खटनावाली गांव के सूखे कुएं से दवाइयों के 274 कार्टन बरामद किए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। बरामद दवाइयों में हृदय रोग, डायबिटीज और एलर्जी से संबंधित दवाएं शामिल हैं। इनमें लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा जैसी दवाइयां बताई गई हैं।
ड्रग डिपार्टमेंट की ओर से बरामद दवाइयों की वास्तविकता, गुणवत्ता, बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जांच की जा रही है।
दवाइयां बरामद होने के बाद राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट ने इसकी जानकारी उत्तर प्रदेश के औषधि नियंत्रक, आगरा के औषधि निरीक्षक और संबंधित दवा निर्माता कंपनियों को दी। इसके बाद यूपी ड्रग डिपार्टमेंट ने भी कार्रवाई करते हुए दवाइयां जब्त कीं और मलपुरा थाने में संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
जांच में यह भी सामने आया कि बरामद दवाइयों के स्टोरेज, खरीद और बिक्री से संबंधित आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध नहीं थे।
मामले में गिरफ्तार सलुआ उर्फ मुकीम के मोबाइल फोन से कुछ वीडियो मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार 27 सितंबर की रात के एक वीडियो में नदी के किनारे दवाइयों पर डीजल डालकर उन्हें जलाते हुए दिखाया गया है। पुलिस अब इन वीडियो और मोबाइल से मिले अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस मामले में अब तक हिमांशु अग्रवाल, इकरार, शामिन, सलुआ और आशीष को गिरफ्तार किया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार हिमांशु अग्रवाल पर उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप भी सामने आया था। इस मामले में उसे जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। दिसंबर में जेल से बाहर आने के बाद उसके दोबारा इस नेटवर्क में शामिल होने की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि हिमांशु के पिता के नाम से मेडिकल स्टोर का लाइसेंस था। अधिकारियों के अनुसार हिमांशु पहले भी नकली दवाओं से जुड़े मामले में यूपी में गिरफ्तार हो चुका है और उस जांच में पुडुचेरी तक दवाओं की सप्लाई का कनेक्शन सामने आया था।
जांच एजेंसियां अब इस सवाल का जवाब तलाश रही हैं कि आगरा से लाई गई दवाइयों को भरतपुर के बयाना स्थित खटनावाली गांव के सूखे कुएं में ही क्यों छिपाया गया। साथ ही, ट्रक चालक को गांव में मौजूद सूखे कुएं की जानकारी कैसे मिली, इसकी भी जांच की जा रही है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक कुएं और आसपास के क्षेत्र में मौजूद एक मेडिकल स्टोर के बीच संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
कुएं से कुछ एक्सपायरी दवाइयां मिलने की बात भी सामने आई है। अब जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि कहीं एक्सपायरी डेट बदलकर इन दवाइयों को दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी तो नहीं थी।
ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार एक्सपायरी दवाइयों को निर्माता कंपनी को वापस करने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्लेम मिलता है। ऐसे में जांच एजेंसियां इस आशंका की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं ऐसी दवाइयों पर पहले क्लेम लेने के बाद उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की कोशिश तो नहीं की जा रही थी।
फिलहाल पुलिस और ड्रग डिपार्टमेंट बरामद दवाइयों की गुणवत्ता, उनके स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और पूरे मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं।
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